उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर तीखा विवाद खड़ा हो गया है। बलिया से समाजवादी पार्टी के सांसद सनातन पांडेय ने पुलवामा आतंकी हमले को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। टाउन हॉल में आयोजित एक विशेष मतदाता पुनरीक्षण शिविर को संबोधित करते हुए सपा सांसद ने कहा कि वर्ष 2019 में हुआ पुलवामा हमला किसी विदेशी साजिश का नतीजा नहीं था, बल्कि यह भारतीय जनता पार्टी की सोची-समझी रणनीति थी। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। सांसद का कहना था कि उस समय देश का माहौल बीजेपी के खिलाफ बन चुका था और चुनाव से ठीक पहले जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की घटना को अंजाम दिया गया।
2019 चुनाव और पुलवामा कांड पर सपा सांसद का आरोप
सनातन पांडेय ने अपने भाषण में कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले पूरे देश में यह भावना थी कि बीजेपी को सत्ता से बाहर किया जाए और गैर-बीजेपी दलों की सरकार बने। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी माहौल को बदलने के लिए पुलवामा कांड को अंजाम दिया गया। सपा सांसद ने कहा, “पुलवामा भारत के प्रधानमंत्री और उनके सहयोगियों की कूटनीति का हिस्सा था, जिससे लोगों का ध्यान असली मुद्दों से हटाया जा सके।” उन्होंने दावा किया कि इस घटना ने चुनावी माहौल को पूरी तरह से बदल दिया और देश की जनता का फोकस सुरक्षा और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर चला गया। सांसद के इस बयान को लेकर बीजेपी समर्थकों और राजनीतिक विश्लेषकों में नाराजगी साफ देखी जा रही है।
क्या था पुलवामा हमला और उसका असर
गौरतलब है कि 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर-नेशनल हाईवे पर सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ था। इस हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे, जिससे पूरे देश में शोक और गुस्से का माहौल बन गया था। भारत सरकार ने इस हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया था, जबकि पाकिस्तान ने किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया था। इस घटना के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में भारी तनाव देखने को मिला। 26 फरवरी 2019 को भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी। यह घटना देश की राजनीति और सुरक्षा नीति दोनों के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हुई थी।
जांच, कार्रवाई और अब उठते सियासी सवाल
पुलवामा आतंकी हमले की जांच में कुल 19 आरोपियों की पहचान की गई थी। अगस्त 2021 तक मुख्य आरोपी समेत छह आतंकवादी मारे गए, जबकि सात को गिरफ्तार किया गया था। इस हमले को लेकर अब तक आधिकारिक तौर पर इसे आतंकवादी साजिश ही माना जाता रहा है। ऐसे में सपा सांसद सनातन पांडेय का यह बयान कई नए सवाल खड़े कर रहा है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बयानबाजी तेज होने की संभावना है। बीजेपी की ओर से इस बयान को शहीद जवानों का अपमान बताया जा सकता है, जबकि समाजवादी पार्टी इसे राजनीतिक अभिव्यक्ति का हिस्सा बता सकती है। आने वाले दिनों में यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है और संसद से लेकर सड़क तक इसकी गूंज सुनाई दे सकती है।
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